
५. चिड़िया की पाती
✍️ लेखक: राजेश गनोदवाले
माननीय मुख्यमंत्री जी,
सादर नमस्कार!
मैं, गौरैया हूँ। वहीं जिस से आप सब चिड़िया कह लिया करते हैं। वही गौरैया जो आपके गाँव के घर के आँगन में फुर्रकती फिरती थी। जिसे बचपन में भोजन करते समय आप चावल के दाने खिलाया करते थे। जिसके घोंसले देखने के लिए कभी-कभी दिनभर भटकते रहते थे। जंगल कट गए, गाँव शहर में आ गए। कटे गए, कि भला चिड़िया का मुख्यमंत्री से क्या काम? वैसे भी मेरी औकात इतनी कहाँ कि आपके सामने फहरिया लहराऊँ, एकाध बार मन बनाकर ही जनदर्शन में मिलूँ लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। कोई सम्बंध पंचायतों से नहीं तो प्रशासनिक अधिकारियों ने इधर हालात ही कुछ ऐसे कर दिए कि अपनी पीड़ा (वैसे हम सबकी) आपके सामने कहने का साहस किया क्योंकि मैं आपके राज्य की निवासिनी हूँ और आज मैं नजर आ रही हूँ। आपका सहयोग चाहता हूँ। दुखी हूँ। बहुत दुख की घड़ी में मैं कहाँ जाऊँ? मैं आप तक पहुँच सकती नहीं। अतः पत्र लिखकर अपनी बात आप तक पहुँचा रही हूँ।
बात ऐसी है, मैं टाउन हॉल परिसर में रहा करती थी, पता ठिकाना तो मेरा अब भी वहीं है लेकिन घर उजड़ गया। आप याद कीजिए, इसी टाउन हॉल के बाहर दो घने पेड़ थे। अपने रंग में रँगे हुए हरे-भरे लहलहाते झूमते रहते थे। कभी किसी को कोई कट नहीं पहुँचाई। अच्छे तंदुरुस्त बिला वजह एक किनारे, गर्मी के लिए इन पेड़ों ने कभी आॅक्सीजन पैदा नहीं की। हमारी बिरादरी के लिए ही दोनों बृजुग पेड़ वरदान थे। मैंने माँ से मैंने सुना था उनकी माँ भी इसी पेड़ की फुनगी शाख पर जन्मी थी। जानती हूँ, इसी पेड़ में मैंने अपना जीवन साथी पाया। बाते वसंत की मेरी परिवार बना और माँ ही तो बच्चों को भी बनी। बच्चे खूब चहकते गए हैं, ऐसा रिश्तेदार कहा करते थे। अपनी दिनचर्या के मुताबिक इन बच्चों की धौंसले में बेजोड़नी छोड़ मैं दाना-पानी की तलाश में उड़ जाया करती थी। सभी जानते हैं कि हम वैसी ही नरम-नाजुक हुआ करती हैं; ऊपर हमारे बहुएँ। उनकी उम्र ही क्या थी। उस समय में इतने कोलाहल में के पेड़ों की पत्तियों को शोरगुल सुन आने से मुँह लिया करती हूँ, फिर दिनभर का शोरगुल अलग। उन पेड़ों का यही घनापन भयंकरतम शोर को रोक दिया करता था और मैं अपने बच्चों के संग चैन की नींद में डूब जाया करती थी। दोपहर में मैंने लोगों को हल्की बख्शों की छाँव में दो लंबु कुर्सियों में देखा है। छोटे ढाबा ढोल के कार्यक्रमों में मेहमान भी इनही पेड़ों की छाँव में बैठकर खाना खाते दिखाई देते थे। इसी बहाने हमें भी कुछ दाना-पानी मिल जाता था।
सब कुछ ठीक था कि अचानक एक रोज़ हम लोगों की दुनिया उजड़ गई। अचानक कुछ लोग आए और इन पेड़ों के दर्द-गिरे चक्कर काटने लगे। उनके इरादे ठीक नहीं थे, मैं इतना डर गई कि उस दिन दोस्तों से निकली नहीं, मेरे बच्चे भी पंखों की ओट में दुबक गए। शाम होने को आई, मैं घौंसले में ही रही। सूरज डूब रहा था। शालगृह भी शांत और पेड़ सोने की तैयारी में। अनुमान लगाएँ कि कोई पूरी रात हिला देता हो। उनका कलेजा जोर-जोर से धड़क रहा था। मुझे डर लग रहा था, मैं अपने बच्चों को सौंफना भी सकी जैसे तेज आँधी आई। कुछ ही समय में वह पेड़ जमीन पर आ और मेरे बच्चों का कहीं अता-पता नहीं, ना मालूम किधर फेंका गए। पेड़ क्या काटा हमारे भाई-बंधु, सब साख उखड़ गए।
पता चला कि सौंदर्यीकरण में बाधा थे ये पेड़, इसलिए काटे गए। मुझे निराशा मिली कि पेड़ों से सौंदर्य खराब होता है। हमने तो इन पेड़ों में, अपने बच्चों के चक्कर में, मैं पेड़ कटने का दर्द लगभाग भूल गई। चिट्ठी लिखने का मन नहीं आता लेकिन सौंदर्यीकरण के दुहाई देने वाले–दर से मुझे खुद कुर्सी पकड़ दी गई। अब जो पेड़ कटे वे कलेक्टरों के पीछे ढूंढते रहे हैं, जहाँ मैंने नया ठिकाना ढूंढा था। भला अब इन पेड़ों में बधा था? बड़ा अजीब है। वैसे भी आजकल शहरों में पेड़ों का 'समारोह उत्सव' चल रहा है। प्रशासन और अफसर, कौन देता है अनुमति? ठीक से विकास होना चाहिए, 'फॉरेस्ट' जल्दी है लेकिन कोई ये क्यों नहीं समझता कि पेड़ और पक्षी भी उतने ही जरूरी हैं।
तज्जुब मुझे इस बात का है कि पर्यावरण आज लोग देखिए, सोचिए, नीति-सीमाएँ बना रहे हैं! फिर लाचार गौरैया इन सब पर सोचने लगती है। इतना तो जानती हूँ कि आपके राज्य की पर्यावरण की नई कमिटी अब इस ओर ध्यान दे रही है।
पूरा का पूरा पेड़ उखाड़ ठीक उसी तरह इनका अन्यत्र रोपण किया जा सकता है। हम उसकी मदद ले सकते हैं पर ऐसा भी नहीं हो पा रहा। बाकी वहाँ चल दी हूँ जहाँ कोई चारा नहीं लेकिन वहाँ क्यों, जिधर ज़रूरत नहीं है।
पहले विचार किया कि अपनी बिरादरी के संग आपको मन का दुख बाँटूं, पर मिलना आसान कहाँ, फिर उससे फायदा भी क्या होता? आपके पास समय कहाँ है? आजकल कुछ बड़े मुद्दा बनते ही रहते हैं। एक ही चारा नजर आया, चिट्ठी लिखूं। कहते हैं, पीड़ा का अनुभव वैद्य ही कर पाते हैं। आपके बड़ा भला कौन वैद्य हो सकता है। आपके पास इतने संसाधन हैं। आपके एक इशारे पर चीजें इधर से उधर हो जाती हैं। मैंने सोचा कि अपनी बात आप तक पहुँचा दूं।
बहुत सोच-विचार करके यह पत्र लिख रही हूँ। पत्र में मैं विस्तार रूप से अपने दुःख अपने साथियों पर आए संकट का विवरण दिया है। बिना पत्र के आपको कैसे पता लगेगा कि हमारी पूरी प्रजाति संकट में है। शहर-गाँव हमारे ठौर-ठिकाने को, धीरे-धीरे से नष्ट होते जा रहे हैं, बड़ी खामोशी से समय गायब हुई जा रही है। कभी समय मिले तो पैदल घूमकर देखिए। धूल से फेंके हुए हैं। कोई ठीक से साँस भी नहीं पाता, पेड़-पौधों की पत्तियाँ ऐसे मुरझा जाती हैं मानो उन्हें पीटाला हो गया हो। ताजा हवा की तलाश में सुबह लोग घूम निकलते हैं। वे हवा कम, प्रदूषण अधिक लेकर लौटते हैं।
इन बग़ीचों में सुबह-सुबह में जब लोगों की हँसी देखती हूँ तो मेरे लिए तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि वो हँस रहे हैं या हँफ रहे हैं। शायद इसीलिए नहीं कह पाते कि मेरे घौंसले उजड़ गए। पेड़ मेरे सब कुछ हैं, क्योंकि अब तो वही एक छाँव बचा है। आप लोग दिखिए, कैसे जी पाएँ? आपके सामने तो पूरी पीढ़ी है। कैसे जिएँगे? क्या हमने अपने आने वाली पीढ़ी को भविष्य? मेरी बातें कड़वी लगे तो क्षमा कर दीजिए। यों भी मैं फेंफड़े जल्दी जवाब दे लगते हैं। फिर किसी पेड़ में फुदकती हूँ तो कुछ राहत मिलती है। काफी समय लिया, बड़ी व्यस्त दिनचर्या रहती है आपकी। मैं भी अपने बच्चों की तलाश में निकलती हूँ। न जानें दोनों हैं या नहीं, बेघर तो किस हाल में। कड़ा कदम उठाइए, ताकि हमारा यह नगर, हमारा राज्य हरा-भरा बन सके।
यहाँ पाठ ‘चिड़िया की पाती’ पर आधारित सभी प्रमुख श्रेणियों में विभिन्न प्रकार के प्रश्न (वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, व्याकरण एवं लेखन) क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किए गए हैं:
🟣 1. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
(क) सही विकल्प चुनिए:
-
'चिड़िया की पाती' किसने लिखी है?
a) प्रेमचंद
b) रामधारी सिंह दिनकर
c) राजेश गनोदवाले ✅
d) हरिवंश राय बच्चन -
गौरैया किस स्थान पर रहती थी?
a) स्कूल के मैदान में
b) टाउन हॉल परिसर के पेड़ों पर ✅
c) खेत में
d) तालाब के पास -
पेड़ों को क्यों काटा गया?
a) इमारत बनाने के लिए
b) सौंदर्यीकरण के लिए ✅
c) सड़क बनाने के लिए
d) खेती के लिए -
चिड़िया ने किसे पत्र लिखा?
a) प्रधान मंत्री को
b) विद्यालय के प्रधानाचार्य को
c) पर्यावरण मंत्री को
d) मुख्यमंत्री को ✅ -
चिड़िया का पत्र किस रूप में लिखा गया है?
a) कविता
b) निबंध
c) संवाद
d) आत्मकथात्मक पत्र ✅
🟠 2. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
-
चिड़िया ने अपने पत्र में किन समस्याओं का वर्णन किया है?
उत्तर: चिड़िया ने पेड़ों की कटाई, अपने घोंसले के उजड़ने, बच्चों के खो जाने और प्राकृतिक आवास के समाप्त होने जैसी समस्याओं का वर्णन किया है। -
गौरैया की पीड़ा क्या है?
उत्तर: गौरैया की पीड़ा यह है कि उसके और उसके बच्चों के रहने का स्थान नष्ट हो गया, जिससे उसकी पूरी बिरादरी संकट में है। -
पेड़ हमारे जीवन के लिए क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर: पेड़ छाया, शुद्ध वायु, पक्षियों के बसेरे और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। -
लेखक ने यह पत्र किस रूप में प्रस्तुत किया है?
उत्तर: लेखक ने यह पत्र गौरैया की ओर से मुख्यमंत्री को लिखा हुआ कल्पित पत्र के रूप में प्रस्तुत किया है।
🔵 3. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
-
'चिड़िया की पाती' पाठ से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: यह पाठ हमें प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशील बनाता है। यह बताता है कि विकास के नाम पर हम पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं जिससे न केवल पर्यावरण असंतुलित हो रहा है बल्कि अनेक जीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। हमें अपने आस-पास के पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए और पशु-पक्षियों के आवास का ध्यान रखना चाहिए। -
पेड़ों की कटाई से होने वाले दुष्परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पेड़ों की कटाई से जलवायु असंतुलन, प्रदूषण में वृद्धि, जैव विविधता में कमी, पक्षियों के आवास का नाश और तापमान में वृद्धि जैसे अनेक दुष्परिणाम होते हैं। यह न केवल पर्यावरण को बल्कि मानव जीवन को भी प्रभावित करता है। -
पत्र लेखन के इस रूप से लेखक ने कौन-सी प्रभावी बात कही है?
उत्तर: लेखक ने गौरैया के माध्यम से संवेदनशीलता, पर्यावरण संकट और प्रशासन से संवाद को पत्र के रूप में बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। इससे पाठक भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है और विषय को गंभीरता से सोचने पर मजबूर होता है।
🟢 4. व्याकरण आधारित प्रश्न (Grammar Based Questions)
(क) विलोम शब्द लिखिए:
| शब्द | विलोम शब्द |
|---|---|
| उजड़ना | बसना |
| दुख | सुख |
| कटाई | रोपण |
| डर | साहस |
| शोर | शांति |
(ख) निम्न वाक्यों में संज्ञा और विशेषण पहचानिए:
-
वाक्य: दो घने पेड़ थे।
– संज्ञा: पेड़
– विशेषण: घने -
वाक्य: सुंदर घोंसला पेड़ों पर बना था।
– संज्ञा: घोंसला, पेड़ों
– विशेषण: सुंदर
(ग) मुहावरे का अर्थ बताइए:
- पाँव तले ज़मीन खिसकना – बहुत बड़ा आश्चर्य या सदमा लगना।
(घ) उचित काल पहचानिए:
- मैं अपने बच्चों को खोज रही थी। – मिश्रित काल (भूत + वर्तमान)
🔴 5. लेखन कार्य (Creative Writing)
(क) पत्र लेखन:
विषय: "पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने हेतु मुख्यमंत्री को पत्र"
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
[राज्य का नाम]विषय: पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाने हेतु प्रार्थना पत्र
महोदय,
मैं आपके ध्यान में यह बात लाना चाहता हूँ कि हाल ही में हमारे क्षेत्र में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हो रही है जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि पक्षियों का बसेरा भी उजड़ रहा है।आपसे निवेदन है कि कृपया संबंधित विभाग को दिशा-निर्देश दें जिससे वृक्षों की रक्षा हो और नई पौधारोपण योजना चलाई जाए।
धन्यवाद।
भवदीय,
[आपका नाम]
[पता]
(ख) अनुच्छेद लेखन:
विषय: "पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता"
पर्यावरण हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। पेड़-पौधे, नदियाँ, पशु-पक्षी सभी पर्यावरण के अंग हैं। आज विकास की दौड़ में हम अपने पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं। वनों की कटाई, प्रदूषण और अति दोहन से जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं। हमें वृक्षारोपण करना चाहिए, जल की बर्बादी रोकनी चाहिए और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। पर्यावरण की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
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