-मालतीबाई दांडेकर
"१३. मोठी आई" या पाठाचा हिंदी अनुवाद
१३. बड़ी माँ
✍🏻 मालतीबाई दांडेकर
हमारी माँ हमसे कितना स्नेह करती है! वह हमें खाना खिलाती है, प्यार से गोद में लेती है, कहानियाँ सुनाती है। हमारी माँ कितनी प्यारी होती है!
लेकिन इस माँ से भी एक बड़ी माँ है। वह भी कितनी प्यारी है! उसने हमें और आप सबको ज़रूरत की हर चीज़ पहले से ही तैयार करके दी है — किसी न किसी रूप में वह हमें मिल ही गई है। यह जो खाने की थाली तुम्हारे सामने है, उसमें की हर चीज़ हमें इस बड़ी माँ की वजह से ही मिली है। तुम जिस घर में रहते हो, उसके लिए ज़रूरी लकड़ी और पत्थर भी उसी माँ ने दिए हैं। कौन है यह बड़ी माँ? उसका नाम है — भूमि! ज़मीन!
ज़मीन में क्या है? मिट्टी। क्या वही माँ है? तुम कहोगे — “सच में?” हाँ, वही सच है। मिट्टी ही है ज़मीन में; लेकिन मिट्टी को तुम हल्के में मत समझो। मिट्टी है, तभी तो हम जीवित हैं।
खाने की थाली में जो कुछ भी है, वह सब कुछ बड़ी माँ ने दिया है — यानी कि वह ज़मीन से ही निकला है। गेहूँ की रोटी, ज्वार की भाकरी, चावल का भात — ये सब कहाँ उगते हैं? खेतों में ही ना! तख्ती और पेंसिल में लगने वाला मुलायम पत्थर भी ज़मीन से ही मिलता है।
चाय में जो शक्कर है, वह गन्ने से बनती है; पर गन्ना कहाँ उगता है? ज़मीन में। केरोसीन कहाँ मिलता है? ज़मीन के नीचे की खदानों में। केले, बेल, अमरूद, आम, नारियल, अंगूर, कटहल — ये सब तुम्हें ज़मीन की वजह से ही मिलते हैं। अगर ज़मीन न होती, तो इनका एक भी अंश नहीं मिलता। सारी सब्ज़ियाँ, दुनिया के सारे फूल, और दवाइयों के सारे पेड़ भी ज़मीन से ही जन्म लेते हैं और बढ़ते हैं। है ना हमारी माँ कितनी महान?
तुम जो कपड़े पहनते हो, वे सूती और रेशमी होते हैं। सूत किससे बनता है? कपास से। और कपास कहाँ से मिलता है? कपास के पौधे से। रेशम कहाँ से मिलता है? रेशम के कीड़े होते हैं, जो शहतूत के पेड़ पर पलते हैं। यह कपास और शहतूत के पेड़ भी ज़मीन में ही उगते हैं। इससे साफ़ समझ में आता है कि ज़मीन ही हर चीज़ को जन्म देती है।
चाँदी, रुपए, पीतल, ताँबा — इन सबकी खदानें बड़ी माँ के पेट में छुपी हुई हैं। पीतल, ताँबा और टीन न होते, तो बर्तन किस चीज़ के बनाते? सोना और चाँदी न होते, तो गहने कहाँ से मिलते? और सुनो! इस बड़ी माँ के पेट में लोहा और कोयले की भी विशाल खदानें हैं। लोहा और कोयले के कारण ही मिल और कारखाने चलते हैं। अगर कारखाने न होते, तो लोहे की कुर्सियाँ और पलंग नहीं बनते। सुई, पिन, चाकू, कैंची, बटन, काँच की चीज़ें, मोटरगाड़ियाँ, रेलगाड़ियाँ, हवाई जहाज़ — ये सब कुछ नहीं बन पाते, अगर लोहा और कोयला न होता! बताओ, ये सब कुछ देने वाली माँ बड़ी नहीं तो कौन है?
अब घर की बात करें, तब भी वही उत्तर मिलेगा। तुम्हारा घर किससे बना है? पत्थर, मिट्टी, ईंट, चूना और लकड़ी से। घर में लकड़ी के खंभे, दरवाज़े, खिड़कियाँ हैं। दरवाज़ों के कुंडे, चौखट और ताले-चाभियाँ लोहे की हैं।
इनमें से पत्थर और मिट्टी ज़मीन से ही लाए गए हैं। ईंट किसकी बनी होती है? लाल मिट्टी की। यह लाल मिट्टी कहाँ से आती है? ज़मीन से ही। चूना कहाँ मिलता है? ज़मीन में चूने की चट्टानें होती हैं — उनसे चूना बनता है। लकड़ी कहाँ से लाते हैं? बड़े-बड़े जंगलों से सूखे हुए पेड़ काटकर लाते हैं। दरवाज़े पर जो लोहे की चिटकनियाँ, ताले, कीलें लगी होती हैं, वह लोहा भी भूमि माता के पेट से ही मिला है।
तुम कोई भी चीज़ देख लो — ज़मीन की वजह से ही वह तुम्हें मिली है। यह अब तुम समझ ही गए होगे।
तुम दूध, दही, घी खाते हो! ये गाय-भैंसों से मिलते हैं; पर गाय-भैंसें क्या खाकर जीवित रहती हैं? घास और चारा। और ये कौन देती है? हमारी बड़ी माँ — ज़मीन।
दुनिया की हर सुंदर चीज़, इसी तरह बड़ी माँ से ही उत्पन्न हुई है, उसी से जीती है, और उसी में बढ़ती है।
वह तुम्हें खाना, कपड़े, गहने, घर, अनाज, बर्तन, चाय-शक्कर, तख्ती-पेंसिल — सब कुछ देती है। इस बड़ी माँ के कितने उपकार हैं, यह हमें मानना चाहिए! और यह ज़मीन या धरती माँ ही हमारी मातृभूमि का छोटा रूप है! उसी भूमि का अन्न खाकर हम बड़े हुए हैं, समझदार बने हैं। मनुष्य को हर चीज़ इसी भूमि ने दी है। तो क्या हमें अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम नहीं होना चाहिए?
हमारी बड़ी माँ ही हमारी मातृभूमि है!
"१३. मोठी आई" वर आधारित विविध प्रकारचे स्वाध्याय प्रश्नोत्तरे
🟣 अ) प्रश्नोत्तरे (सरळ उत्तरे द्या):
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मोठी आई कोण आहे?→ मोठी आई म्हणजे आपली भूमाता, म्हणजेच जमीन.
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जेवणाच्या ताटातले जिन्नस कुठून मिळतात?→ ते सगळे जिन्नस जमिनीतून मिळतात.
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कपड्यांसाठी लागणारे सूत कोणत्या झाडापासून मिळते?→ सूत कापसाच्या झाडापासून मिळते.
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रेशमी धागा कोणत्या किड्यांपासून मिळतो?→ रेशमाचे किडे तुतीच्या झाडावर राहतात, त्यांच्यापासून रेशीम मिळते.
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लोखंड आणि कोळशाचे काय उपयोग आहेत?→ गिरण्या व कारखाने चालण्यासाठी ते उपयोगी पडतात.
🟠 ब) योग्य पर्याय ओळखा (बहुपर्यायी प्रश्न - MCQs):
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खालीलपैकी कुठली वस्तू जमिनीतून मिळत नाही?अ) चांदीब) पंखाक) तांबेड) लोखंड✅ उत्तर: ब) पंखा
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रेशीम कोणत्या किड्यापासून मिळतो?अ) झुरळब) रेशमाचा कीडाक) गवताळ कीडाड) पिंपळ कीडा✅ उत्तर: ब) रेशमाचा कीडा
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चुना कोणापासून तयार होतो?अ) तांब्याच्या खडकांपासूनब) गाळापासूनक) चुनखडीच्या खडकांपासूनड) काळ्या मातीपासून✅ उत्तर: क) चुनखडीच्या खडकांपासून
🟢 क) योग्य ते जोड्या लावा:
| स्तंभ अ | स्तंभ ब |
|---|---|
| ऊस | रेशीमाचे किडे |
| कपाशीचे झाड | चुना |
| तुतीचे झाड | साखर |
| चुनखड्याचा खडक | कापूस |
✅ जोड्या:
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ऊस → साखर
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कपाशीचे झाड → कापूस
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तुतीचे झाड → रेशीमाचे किडे
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चुनखड्याचा खडक → चुना
🔵 ड) वाक्य पूर्ण करा:
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मोठी आई आपल्याला ___________ देते.→ अन्न-वस्त्र, घर, दागिने
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घर बांधण्यासाठी लागणारी सामग्री ___________ पासून मिळते.→ जमिनीतून
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लोखंड आणि कोळशामुळे ___________ चालतात.→ गिरण्या आणि कारखाने
🟣 ई) तुम्हाला काय वाटते? (मत व्यक्त करा):
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आपण भूमातेचे उपकार का मानले पाहिजेत?→ कारण ती आपल्याला अन्न, वस्त्र, निवारा, औषधे, दागिने, शिक्षणासाठी साधने – सर्व काही देते. ती नसती तर आपण जगूच शकलो नसतो.
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तुम्ही जमिनीवर प्रेम दाखवण्यासाठी काय करू शकता?→ आपण जमिनीची निगा राखू शकतो, झाडे लावू शकतो, प्रदूषण टाळू शकतो, वाया घालवणं थांबवू शकतो.
🔶 फ) संक्षिप्त उत्तरे लिहा:
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जमिनीमुळे आपल्याला कोणकोणत्या गोष्टी मिळतात?→ अन्न, फळे, भाज्या, कपडे, औषधे, लाकूड, खनिजे, भांडी, घरासाठी साहित्य, गहू-तांदूळ, लोखंड, कोळसा इत्यादी.
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रेशम कसा मिळतो?→ रेशमाचे कीडे तुतीच्या झाडावर राहतात, त्यांच्यापासून रेशम मिळतो.
🔷 छोटे निबंध:
✏️ माझी मोठी आई – जमिनीचे उपकार
माझी मोठी आई म्हणजेच माझी भूमी. ती मला अन्न, वस्त्र, निवारा, औषधे, दागिने, शिक्षण देण्यासाठी लागणाऱ्या वस्तू सगळं काही देते. तिचे उपकार अमाप आहेत. तिच्या उपकारांमुळेच मी जगतो आहे.
संकल्पना, प्रस्तुति, संपादन एवं लेखन


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